Thursday, 14 June 2012

गर्मी के मौसम में काम आने वाली दवाइया और कुछ विशेष परिस्थिति में प्रयुक्त दवाइया

गर्मी के मौसम में काम आने वाली दवाइया और कुछ विशेष परिस्थिति में प्रयुक्त होने वाली कुछ दवाइयों पर एक नजर.

हमारे पास एक बन्दा आया. गर्मी से बेहद परेशान. उसने कहा इतनी गर्मी की मानो उसे शरीर में चमड़ी पर सुई चुभ रही है. उसे एपीस मेल ३० की चंद खुराक खाने को दी गयी. पहली खुराक खाने के बाद ही उसने कहा क्या आश्चर्य है. सुई चुभना तो बंद हो गया.

एक सज्जन जो बोलते वक़्त हकलाते थे, उन्हें स्त्रमोनियम २०० सुबह शाम ३ दिन लेने से आराम हो गया.

एक सज्जन पेट फुला हुआ सा रहता है ऐसी शिकायत लेकर आये. उन्हें लाय्कोपोदियम २००, सल्फर २०० और कल्केरिया कार्ब २०० एक के बाद एक लेने से आराम मिला.

एक सज्जन ने कहा की उन्हें पेट में छाती के निचे ऐसा दर्द होता है जैसे कोई उन्हें मार रहा हो. उन्हें अर्निका २०० की कुछ खुराक से लाभ हुआ.

एक सज्जन को खेल कूद से अंडकोष में दर्द शुरू हुआ, उन्हें अर्निका २०० से लाभ हुआ.

एक सज्जन को चेहरे के सिर्फ दाई ओर  दर्द हो रहा था. उन्होंने कहा पूरा चेहरा सिर्फ दाहिनी ओर दर्द करता है. उन्हें लाय्कोपोदियम ३० की चंद खुराको से लाभ हुआ.

एक सज्जन को नक्स वोमिका की असफलता के बाद लाय्कोपोदियम ३० ने कब्ज में जबरदस्त आराम पहुचाया.

एक सज्जन ने कहा की उन्हें रात को नींद नहीं आती. जो सारी बाते उन्हें दिनभर सिखाई जती है वही उनके दिमाग में रात भर चलती है. उन्हें फास्फोरस २०० की कुछ खुराको ने लाभ पहुचाया.

एक सज्जन जो दोपहर में होने वाली आम्ल पित्त की शिकायत लेकर उपस्थित हुए उन्हें लाय्कोपोदियम २०० ने जबरदस्त लाभ पहुचाया.

एक सज्जन जिन्हें गर्मी और पसीने के कारण अंडकोष पर छोटे छोटे फोड़ों के साथ जबरदस्त खुजली हुई सल्फर २०० की चंद खुराको से पीड़ा से संपूर्ण रूप से मुक्त हो गए.

एक सज्जन को परेड में दूर तक चलने से पसीने के कारण काख में और पीठ पर दर्द करने वाले लाल निशान बने. सल्फर ३० की कुछ खुराको से उन्हें दर्द से छुटकारा मिल गया.

एक सज्जन खुजली की पुरानी शिकायत लेकर आये थे. उन्हें सल्फर २०० से आराम मिला. लेकिन खुजली पलटकर आई. उन्हें सुबह आर्सेनिक एल्ब २०० और शाम को सल्फर २०० लेते रहने से राहत मिली.

एक सज्जन को हाथो के तलवो में बहुत पसीना छुटता था. उन्हें कमर दर्द की पुरानी शिकायत थी. क्याल्केरिया कार्ब २०० ने उन्हें तलवों के पसीने में राहत पहुचाई. रहस टॉक्स २०० ने उनके कमर का दर्द ८०% कम कर दिया.

एक सज्जन को पैर के अंगूठे में दर्द था. उन्हें ग्रेफैट २०० से राहत मिली. जब उन्हें गर्मी के कारण खुजली छूटी तो सल्फर २०० ने आराम पहुचाया.

गर्मी से जब आदमी बेहद पानी पिता है, उसका गला सूखता है, मल सुखा आता है और बदन में बुखार जैसा दर्द होता है तो ब्रायोनिया २०० या ३० कारगर साबित होती है. यहाँ नेट्रम मुर के साथ उसकी तुलना करे. ब्रायोनिया यह गुस्सा करने वाला हट्टा कट्टा व्यक्ति है यह एक बात ध्यान रखे.

सफ़र के बाद या खाने में फेर फार से पेट में गडबड़ी होती है तो नक्स वोमिका एक कारगर दवा है.

एक बन्दे को गर्मी के कारण चक्कर आने लगे. ग्लोनोइन ३० ने तुरंत राहत पहुचाई.

एक वयस्क सज्जन गर्मी से व्याकुल हो गए. ग्लोनोइन ३० ने लाभ पहुचाया.

एक तम्बाखू छोड़ने वाले सज्जन को दात में दर्द शुरू हुआ. भोजन करते वक़्त भरी कष्ट होता. स्ताफिसगरिया २०० और हेक्ला लावा ६ ने लाभ पहुचाया.

सुबह के वक़्त आने वाले चक्कर में नक्स वोमिका मदद करता है.

कृपया निम्नलिखित लिंक पर दिया हुआ विवरण भी देखे. इससे उपरोक्त विवरण को समझने में मदद होगी.

ग्रीष्मकालीन शिविर में दी गयी होम्योपैथिक चिकित्सा का विवरण

Sunday, 1 January 2012

होम्योपैथी पर एक जबरदस्त विडियो

नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये!!
आपके लिए प्रस्तुत है होम्योपैथी पर एक जबरदस्त विडियो
http://www.youtube.com/watch?v=pxXpUaDpsg8

उम्मीद है आपको पसंद आएगा.

धन्यवाद्.

Thursday, 22 September 2011

परिक्षण को अनदेखा न करे, बहोत ज्यादा अतिरेक भी न करे.

यह बहोत जरुरी है की आवश्यक परिक्षण भी किये जाये. यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आ रहे है तो उसका बी पी और ब्लड शुगर देख ले.
बात तो सही है की होम्योपैथी में दवा समग्र लक्षण के आधार पर दी जाती है लेकिन यह भी आवश्यक है की व्यक्ति अपना ब्लड शुगर और बी पी नियंत्रित रखे.
एक बुजुर्ग आदमी को चक्कर आने लगे. इसके पहले जब उन्हें चक्कर आये थे तो नक्स वोमिका २०० से आराम हुआ था. सो उन्हें नक्स वोमिका २०० की एक खुराक दी गयी.
बाद में आर्ग निट २०० भी दिया गया क्यों की वे एक उथल पुथल वाले सम्मलेन में जाने को लेकर परेशान थे.
बाद में काली कार्ब २०० और नक्स वोमिका २०० की एक एक खुराक ने उन्हें राहत पहुचाई.
उन्होंने जब अपना ब्लड शुगर और बी पी चेक किया तो पाया की ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है. असली आराम तो उसे नियंत्रित करने से ही मिलेगा. तो क्या हर छाती के दर्द के लिए दिल की जाच कराये और सरदर्द के लिए दिमाग का फोटो निकाले? सोचना तो आपको है. इसे अत्यंत आगे ले जाना और पीछे छोड़ देना दोनों खतरे से खाली नहीं.

Wednesday, 7 September 2011

होम्योपैथी की दवाइयों में आंतर संबंधो को समझाने वाला एक लेख. (An article explaining inter-relationship of homeopathic remedies.)

होम्योपैथी में दवाए एक दुसरे से सम्बन्ध रखती है. अर्थात एक दवा दूसरी दवा का अनुसरण करने वाली हो सकती है. या एक दवा दूसरी दवा को निरस्त्र करने वाली हो सकती है. दो दवाइया आपस में वैर भाव रखने वाली भी हो सकती है. ऐसा भी संभव है की दो दवाइया एक दुसरे की पूरक हो. और ऐसा भी की दो दवाइयों में कोई भी सम्बन्ध न हो.
हमने जब पहले कहा था की होम्योपैथी में दवाइयों का क्रम मायने रखता है तो इस बात को मद्देनजर रख कर कहा था.
एक बन्दा जो उच्च विद्या विभूषित है, जिसका कमाने की  ओर ध्यान कम है और कहता है की कमाने से अधिक इस बात की ओर ध्यान दे की हमने योगदान कितना किया इसका मूल्यांकन होना चाहिए. सो है तो सल्फर ही. उसे बवासीर की भी तकलीफ थी जिसमे उसे सल्फर और नैट्रिक एसिड ने अच्छा लाभ दिलाया. उसे हरदम एक मीठा मीठा सरदर्द भी चलते रहता है जिससे वह कोई काम लम्बे समय के लिए नहीं कर पाता है. लेकिन कब उसका दिमाग फिर जाए कुछ भरोसा नहीं सो उसमे नक्स वोमिका की झलक भी मिलती है. सर्दी में वह पैर में इतना दर्द महसूस करता है की पैर को जमीन पर रखते ही दर्द होता है और यदि वह ठंडी हवा में सर्दी के मौसम में रहे तो उसके पैर की उंगलियों में सुजन भी आ जाती है. इस तकलीफ में उसे सैलेशिया से राहत मिल जाती है.
एक बार उसने दूषित जल पी लिया. बाद में वह बहोत घबराने लगा. तब उसे आर्सेनिक एल्ब २०० और उसके बाद में सल्फर २०० देने से राहत मिली. जब आदमी खुद की चिंता करता है तो आर्सेनिक एल्ब से राहत मिलती है इस आधार पर उसे आर्सेनिक एल्ब दिया गया. फिर उसे कुछ कब्ज हुई जिसे सल्फर ने ठीक कर दिया. इसके पहले जब उसने ऐसा किया था तो उसे एंटीबायोटिक्स लेने पड़े थे और कुल मिला कर १००-१५० का खर्चा हुआ था.

इस बार बहाना ऐसा हुआ की उसने ३ साल पुराना गुड खा लिया. देखने से ऐसा लगता था की गुड के ऊपर फंगस जमी हुई है. कुछ दिनों के बाद उसे पतले दस्त हुए. दस्त तो पतले थे लेकिन पेट साफ़ नहीं हो रहा था. उसे कैल्क कार्ब २००  की कुछ खुराक दी गयी लेकिन लाभ नहीं हुआ. यहाँ कैल्क का प्रयोग इस आधार पर किया गया की उसपर सिलीशिया काम करती है और सल्फर के बाद कैल्क कार्ब अच्छा असर दिखाती है. उसका पेट थोडा भोजन खाने से ही भरी हो जाता. कुमारी आसव लेने से उसके पेट के भरी होने की समस्या ख़त्म हो गयी. फिर उसे एंटीमोनियम क्रड  २०० खिलाया गया. इसके लगभग एक हप्ते बाद उसे जमकर सर्दी हुई. उसने एक परिचित के यहाँ गरिष्ट भोजन किया. दुसरे दिन उसे बुखार आ गया. उसे नक्स वोमिका २०० और रहस टाक्स २०० अलट पलट कर दिया गया. लेकिन उसका बुखार कम नहीं हुआ. वह अंग्रेजी डाक्टर के पास गया जहा उसे एंटीबायोटिक और एंटीपायरेटिक दिया गया. उसकी प्यास एकदम ख़त्म हो चुकी थी इस आधार पर उसे लायको पोडियम २०० का एक डोज भी दिया गया. जिससे उसे बुखार में तो कुछ राहत मिली लेकिन उसे सर्दी में राहत नहीं मिली. गला भी दर्द हो रहा था और उसे निगलते वक़्त तकलीफ हो रही थी. उसे सिलीशिया २०० दिया गया और बाद में काली मुर ३० और नैटरम फोस ३० दिया गया. अब वह बेहतर महसूस कर रहा है.
उसकी प्यास एकदम ख़त्म हो चुकी थी इस आधार पर उसे बेलाडोंना  २०० का एक डोज भी दिया गया. इसका एक और आधार बनता था उसका सर गर्म होना और बाकि बदन ठंडा. उसके होठ पर एक फोड़ा बन गया है जो एंटीमोनिअम क्रड लेने के बाद उभरा. नक्स वोमिका के कारण फोड़े में तात्कालिक राहत तो मिली लेकिन वह फोड़ा अब भी बरकरार है. काली मुर का चयन कब्ज और इस फोड़े के आधार पर ही किया गया.
लेकिन पूरी बात को यदि देखे तो पता चलेगा की पुराना गुड खाने से और गरिष्ट भोजन करने से सब मुसीबतों को आमंत्रण मिला. इसलिए कहना चाहेंगे की पथ्य ही सर्वोत्तम दवा है.
दो दिन एंटी बायोटिक और एंटी पायरेटिक लेने के बाद भी उसे पूरी राहत नहीं मिली, और उसका पेट साफ़ तो हुआ ही नहीं जो सभी समस्याओ की जड़ था. चुकी उसने सडा हुआ गुड खाया था सो उसे आर्सेनिक एल्ब २०० दिया गया. होम्योपैथी में सल्फर के बारे में कहते है की वह ऐकुट बीमारी में अंत में प्रयोग से बीमारी को ख़त्म कर देता है. सो उसे रात में सल्फर २०० की एक खुराक दी गयी. दुसरे दिन उसे पेट साफ़ होने का अहसास हुआ.

Monday, 5 September 2011

कुछ और आयुर्वेदिक दवाइयाँ (Few more ayurvedic remedies.)

यहाँ हम कुछ और आयुर्वेदिक दवाइयों के बारे में आपको बता रहे है.

१. कुमारी आसव
यह घृत कुमारी से बना होने के कारण इसे कुमारी आसव कहा जाता है. यह पेट की एक जबरदस्त दवा है. वैसे इसका नाम कुमारी आसव होने से पुरुष को घबराने की जरूरत नहीं है.
यदि पेट में दर्द हो, पाचन ठीक से ना हो रहा हो, पेट फूल गया हो, खाने की इच्छा न हो रही हो तो इसके प्रयोग से लाभ होता है. पेट में गैस बनने की शिकायत पर भी यह दवा काम करती है.

२. त्रिफला चूर्ण

यह कब्ज पर काम करने वाला चूर्ण है. इसे रात को सोते समय गरम पानी से लेने से सुबह उठके पेट साफ हो जाता है. इस में आमला होने से यह आँख को फायदा दे सकता है. इसी तरह बहेड़ा से शास के विकार में मदद हो सकती है और फेफड़े मजबूत हो सकते है. रोजाना इसका प्रयोग करना उचित नहीं है. कपालभाती प्राणायाम और अग्निसार क्रिया कब्ज का एक निर्दोष उपाय है और इन प्राणायाम के करने से अनेक लाभ भी होते है. त्रिफला चूर्ण को रात में सोते समय केवल गरम पानी के साथ (ठन्डे के साथ नहीं) एक चम्मच ले.

३. महासुदर्शन चूर्ण

इस चूर्ण का सेवन सभी प्रकार के बुखार में अच्छा लाभ देता है. बुखार के बाद की कमजोरी के लिए भी यह अछि दवा है. इसका सेवन अमृतारिष्ट के साथ करने से यह अधिक लाभ करता है.

४. आमलकी रसायन

यह आख के विकारो में जैसा आँख के रौशनी कम होना, आँख लाल होना, धुप के कारण या अन्यथा आँख में जलन होना ऐसे सभी लक्षणों पर काम करता है. आप इसके अभाव में आमला चूर्ण या आमला स्वरस भी ले सकते है.

Friday, 2 September 2011

जेल्सेमियम (Gelsemium)

इस दवा का प्रयोग व्यक्ति यदि स्टेज पर जाने से घबराए तो हो सकता है. यह व्यक्ति कमजोरी महसूस करता है और कापता है. ऐसे लक्षण पक्षाघात या कम्पवात में भी हो सकते है.
इस व्यक्ति को सर्दी की शिकायत हो सकती है. इसके नाक से पतला या गाढ़ा पानी (द्रव) निकल सकता है.
बरसात के मौसम में जब गर्म वातावरण में सर्दी होती है तो इसका विशेष असर हो सकता है.
हडबडाहट के कारण यदि आदमी को स्त्री से सम्बन्ध रखने में दिक्कत होती है तब भी इसका प्रयोग हो सकता है.
एक रोते बच्चे पर जिसको गोद से निचे उतरने की बिलकुल इच्छा नहीं है, यह दवा काम कर सकती है.

कासटीकम (Causticum)

यह दवा उन लोगो पर अच्छा असर दिखाती है जो दुसरो के प्रति सहानुभूति रखते है और समाज के लिए कुछ करना चाहते है. यह व्यक्ति अक्सर कर्तव्य परायण होता है.

इस व्यक्ति के हाथ पैर में काफी दर्द हो सकता है. इसे पक्षाघात या कम्पवात भी हो सकता है.

इसे नींद आने की समस्या हो सकती है. बिस्तर की गर्मी से यह बेहतर भी महसूस कर सकता है.

इसे मस्सो में भी प्रयोग में लाया जाता है.

इस व्यक्ति की तकलीफ उसके बारे में अर्थात तकलीफ के बारे में सोचने पर बढ़ सकती है. खासकर बवासीर में ऐसा होने की संभावना ज्यादा है.

यह व्यक्ति अपमान या दुःख को सीने से लगाकर उसका अपनी तबियत पर गलत प्रभाव डाल सकता है.

इसको पैखाना सख्त होने की सम्भावना है. कब्ज की भी संभावना हो सकती है.

आपरेशन के बाद यदि पेशाब रुकी हुई है तो यह दवा काम करती है.

आर्गेनटम निट (Argentum Nit)

यह दवा घबराहट की प्रमुख दवाइयों में से एक है. जब व्यक्ति को कही जाना होता है और उसे घबराहट होती है तो यह दवा प्रयुक्त कर सकते है.
यह दवा दस्त पर भी असर करती है ऐसे दस्त जो घबराहट के कारण होते है.
पक्षाघात पर भी इस दवा का असर देखा गया है.
यह व्यक्ति खुली हवा को पसंद करता है. इसे ठंडा मौसम अच्छा लगता है.
इस दवा का असर आँख पर भी देखा गया है.

Wednesday, 31 August 2011

सीना (Cina)

यह कृमी की एक जबरदस्त दवा है. जब भी किसी को पेट में कृमी की शिकायत हो तो इस दवा को प्रयोग कर सकते है.
इस दवा का लक्षण यह भी है की आदमी चिडचिडा हो जाता है.
बच्चे की भूख बढ़ना और शरीर में बढौतरी न होना भी इसका लक्षण मान सकते है.

कैमोमिला (Chamomila)

यह प्रमुख रूप से छोटे बच्चो की दवा है.
यह बच्चा बहोत चिड चिड़ा है.
यदि बच्चे को कब्ज की शिकायत है तो किमोमिला का प्रयोग न किया जाए.
दात निकलते वक़्त जब बच्चे बहोत चिड चिड़े हो जाते है और उन्हें दस्त भी होते है तो यह दवा काम करती है.

Monday, 29 August 2011

सेनेगा (Senega)

यह दवा आँख पर जबरदस्त असर रखती है. कोर्नेया के ऊपर काली परत जमना इसका एक लक्षण है.
आँख के पक्षाघात में भी यह दवा काम करती है. आँख से पानी आना भी इसका लक्षण है.
यह व्यक्ति जब आँख बंद करके कुर्सीसे टेककर गर्दन पीछे की ओर झुकाकर आराम करता है तो बेहतर महसूस करता है.

आयुर्वेदिक दवाइयाँ जो हम अधिकतर होम्योपैथी दवाइयों के साथ प्रयोग में लाते है. (Ayurvedic remedies that we include often in our treatment plan.)

हम अक्सर निचे दी हुई आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग होम्योपैथिक दवाइयों के साथ करते है. जैसा की हम पहले देख चुके है की ये दवाइयाँ शरीर की विभिन्न व्यवस्थाओ को शक्ति प्रदान करती है.

१. चंद्रप्रभा वटी -

यह मूत्र रोगों पर और यौन रोगों पर विशेष असर दिखाती है. 
बार बार पेशाब को जाना, पेशाब में शक्कर का जाना,
स्त्री को सफ़ेद पानी का जाना, मासिक धर्म की अनियमितताए,
पुरुषो को पेशाब में धातु जाने की समस्या,
पेशाब में जलन होना ऐसे अनेक विकारो पर यह दवा काम करती है.

यह स्नायु और हड्डी को भी मजबूती प्रदान करती है. इसलिए इसका प्रयोग कमजोरी में भी करते है.

इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

२. योगराज गुग्गुलु

इस दवा का प्रयोग स्नायुओ को मजबूती प्रदान करता है. बुढ़ापे की व्याधियो जैसे पैर की पिंडलियों में दर्द होना, घुटनों में दर्द होना वगैराह उसमे यह दवा अच्छा असर दिखाती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

३. त्रयोदशांग गुग्गुलु

यह वात विकारो की एक जबरदस्त दवा है. इसके प्रयोग से लकवे (पक्षाघात) में अद्भुत लाभ होता है. लकवा होने के बाद जितने जल्दी इसे प्रयोग में लाया जायेगा लाभ उतना ही जल्द होंगा. यदि लकवा होने के बाद बहोत समय बीत गया है तो एक लम्बे काल के लिए इस दवा का नियमित सेवन करना होगा.
सर्वाइकल स्पोंडीलायटिस में भी यह अच्छा काम करती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

४. सितोपलादी चूर्ण

यह खासी की एक जबरदस्त दवा है. सूखी खासी पर इसे जादू की तरह काम करते हुए देखा गया है. एक चौथाई चम्मच चूर्ण शहद के साथ एक दिन में ३-४ बार ले सकते है.

५. हरिद्रा खंड

यह खुजली की एक जबरदस्त दवा है. शीत पित्त में भी इसे किसी जादू की तरह काम करते हुए देखा है. इसे आधा चम्मच रोजाना पानीसे तीन बार ले सकते है.

क्या होम्योपैथी दवा के साथ दूसरी दवा ली जा सकती है. (Whether it is permissible to take homeopathic remedies alongwith other medication?

जैसे हम पहले देख चुके है की होम्यो पैथी दवा एक मार्गदर्शक का काम करती है.

एलोपैथी दवा शरीर की क्रियाओ को सीधे प्रभावित करती है. प्रयोगशाला में इसी आधार पर उसका संशोधन होता है की वह शरीर में जा कर क्या करेगी. संशोधन के बाद में दवा का प्रयोग पहले प्राणियों और बाद में इंसानों पर किया जाता है.

आयुर्वेदिक दवा शरीर में जो व्यवस्थाये होती है उन्हें मजबूती प्रदान करती है.

उपरोक्त आधार पर यह कहा जा सकता है की होम्योपैथी दवा दूसरी पैथियो की दवा के साथ साथ प्रयुक्त हो सकती है. लेखक का यह मत है की उसे स्टेरोइड के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए.

Sunday, 28 August 2011

बेर्बेरिस वलगारिस (Berberis Vulgaris)

यह दवा असहनीय दर्द की अच्छी दवा मानी जाती है. यह गुर्दों पर विशेष प्रभाव रखती है. इसे गुर्दों की पथरी में काफी प्रयुक्त किया जाता है.
पित्ताशय की पथरी में भी इसका प्रयोग होता है क्यों की यहाँ भी असहनीय दर्द होता है.

Saturday, 27 August 2011

मायज़म सिद्धांत (The theory of Miasm)

मायज़म का सिद्धांत हनीमन ने उसकी पुस्तिका जीर्ण रोग में रखा. हनी मन ने कहा की यह सिद्धांत उसकी १२ साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है.

उसने कहा की यही मायझम हर जीर्ण रोग की जड़ है. केंट ने इस सिद्धांत को बड़े पैमाने पर प्रस्थापित किया. उसने ऐसी दवा भी बतलाई जो इस प्रकार के मायज़म में आराम देगी.

मायज़म का मतलब है एक बदल जो स्वास्थ्य पर छा जाता है. उसने कहा की ८५ % यह आवरण सोरा के रूप में होता है. १५ % यह सिफिलिस या सायकोसिस का रूप लेता है.

सोरा - इस ग्रीक शब्द का अर्थ है कलंक. हनीमन का यह मानना था की त्वचा की बीमारी में, एलर्जी में, बवासीर में सोरा का आवरण छाया रहता है. सोरा आवरण का प्रमुख लक्षण है खुजली होना.
इसकी प्रमुख दवा है. सल्फर, नैटरम मर, कैल्क कार्ब, अर्सेनिकम ऐल्बम, फोस्फोरस इत्यादि.

सायकोसिस  - यह आवरण यौन रोगों में, मूत्र विकारो में, जोड़ो के दर्द में और बलगम के रिसाव में पाया जाता है. मस्सा भी इसका प्रतीक माना जाता है. इस आवरण में तकलीफ वातावरण की नमी से बढ़ जाती है. सास की तकलीफ, नजला, पेशाब में जलन यह पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से इस आवरण को दर्शाते है. इसकी प्रमुख औषधि है थूजा, लेकोपोडियम, नैटरम सल्फ़, कासटीकम इत्यादि.

सिफिलिस - इस आवरण से वात विकार होते है, रक्त के और हड्डी के विकार होते है. तरह तरह के मन के विकार भी हो सकते है. जैसे दारू के अधीन हो जाना, खुदखुशी करने की प्रवृत्ति रखना, पागलपन, फोड़े बनना. ह्रदय रोग और रात को बढ़ने वाले रोग भी इस आवरण के कारण हो सकते है. इसके मुख्य दवाइयां है - आर्सेनिक एल्ब, औरम मेट, मेरकुरी, फोस्फोरुस.



हमें यह लगता है की बहोत ज्यादा इस सिद्धांत में उलझने से यह बेहतर है की समग्र लक्षणों के आधार पर दवा का चयन करे. होम्योपैथी की हर प्रमुख दवा में अनेक आवरणों को हटाने की क्षमता है.

Thursday, 25 August 2011

एकोनाईट (Aconite)

यह दवा जब झटका लगता है तो प्रयुक्त होती है. जैसे अचानक कुछ हो जाता है और व्यक्ति घबरा जाता है तो यह दवा प्रयुक्त होती है.
यदि कोई व्यक्ति अत्यंत ठंडी के कारण अस्वस्थ हो जाता है तो भी इसका प्रयोग कर सकते है.
अत्यंत गर्मी के कारण जब पेट पर असर होता है तो भी यह दवा प्रयुक्त हो सकती है.
बहोत से लोग इसे बुखार में अक्सर प्रयोग करते है पर इस तरह इसका प्रयोग करना उसके संकेतो के आधार पर उचित नहीं प्रतीत होता.

Wednesday, 24 August 2011

स्टेफीसैग्रिया (Staphysagria)

यह व्यक्ति अपमान और दर्द की आग में जलता है.
यह असहनीय दर्द से भी परेशान हो सकता है.
नव वधु को जब पेशाब करने में दिक्क़त आती है तो यह दवा कारगर सिद्ध होती है.
मूत्र से सम्बंधित कठिनाइयों पर यह काम करती है.
हस्त मैथुन की आदत में भी इसे काम करते हुए देखा गया है.