Wednesday, 31 August 2011

सीना (Cina)

यह कृमी की एक जबरदस्त दवा है. जब भी किसी को पेट में कृमी की शिकायत हो तो इस दवा को प्रयोग कर सकते है.
इस दवा का लक्षण यह भी है की आदमी चिडचिडा हो जाता है.
बच्चे की भूख बढ़ना और शरीर में बढौतरी न होना भी इसका लक्षण मान सकते है.

कैमोमिला (Chamomila)

यह प्रमुख रूप से छोटे बच्चो की दवा है.
यह बच्चा बहोत चिड चिड़ा है.
यदि बच्चे को कब्ज की शिकायत है तो किमोमिला का प्रयोग न किया जाए.
दात निकलते वक़्त जब बच्चे बहोत चिड चिड़े हो जाते है और उन्हें दस्त भी होते है तो यह दवा काम करती है.

Monday, 29 August 2011

सेनेगा (Senega)

यह दवा आँख पर जबरदस्त असर रखती है. कोर्नेया के ऊपर काली परत जमना इसका एक लक्षण है.
आँख के पक्षाघात में भी यह दवा काम करती है. आँख से पानी आना भी इसका लक्षण है.
यह व्यक्ति जब आँख बंद करके कुर्सीसे टेककर गर्दन पीछे की ओर झुकाकर आराम करता है तो बेहतर महसूस करता है.

आयुर्वेदिक दवाइयाँ जो हम अधिकतर होम्योपैथी दवाइयों के साथ प्रयोग में लाते है. (Ayurvedic remedies that we include often in our treatment plan.)

हम अक्सर निचे दी हुई आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग होम्योपैथिक दवाइयों के साथ करते है. जैसा की हम पहले देख चुके है की ये दवाइयाँ शरीर की विभिन्न व्यवस्थाओ को शक्ति प्रदान करती है.

१. चंद्रप्रभा वटी -

यह मूत्र रोगों पर और यौन रोगों पर विशेष असर दिखाती है. 
बार बार पेशाब को जाना, पेशाब में शक्कर का जाना,
स्त्री को सफ़ेद पानी का जाना, मासिक धर्म की अनियमितताए,
पुरुषो को पेशाब में धातु जाने की समस्या,
पेशाब में जलन होना ऐसे अनेक विकारो पर यह दवा काम करती है.

यह स्नायु और हड्डी को भी मजबूती प्रदान करती है. इसलिए इसका प्रयोग कमजोरी में भी करते है.

इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

२. योगराज गुग्गुलु

इस दवा का प्रयोग स्नायुओ को मजबूती प्रदान करता है. बुढ़ापे की व्याधियो जैसे पैर की पिंडलियों में दर्द होना, घुटनों में दर्द होना वगैराह उसमे यह दवा अच्छा असर दिखाती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

३. त्रयोदशांग गुग्गुलु

यह वात विकारो की एक जबरदस्त दवा है. इसके प्रयोग से लकवे (पक्षाघात) में अद्भुत लाभ होता है. लकवा होने के बाद जितने जल्दी इसे प्रयोग में लाया जायेगा लाभ उतना ही जल्द होंगा. यदि लकवा होने के बाद बहोत समय बीत गया है तो एक लम्बे काल के लिए इस दवा का नियमित सेवन करना होगा.
सर्वाइकल स्पोंडीलायटिस में भी यह अच्छा काम करती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.

४. सितोपलादी चूर्ण

यह खासी की एक जबरदस्त दवा है. सूखी खासी पर इसे जादू की तरह काम करते हुए देखा गया है. एक चौथाई चम्मच चूर्ण शहद के साथ एक दिन में ३-४ बार ले सकते है.

५. हरिद्रा खंड

यह खुजली की एक जबरदस्त दवा है. शीत पित्त में भी इसे किसी जादू की तरह काम करते हुए देखा है. इसे आधा चम्मच रोजाना पानीसे तीन बार ले सकते है.

क्या होम्योपैथी दवा के साथ दूसरी दवा ली जा सकती है. (Whether it is permissible to take homeopathic remedies alongwith other medication?

जैसे हम पहले देख चुके है की होम्यो पैथी दवा एक मार्गदर्शक का काम करती है.

एलोपैथी दवा शरीर की क्रियाओ को सीधे प्रभावित करती है. प्रयोगशाला में इसी आधार पर उसका संशोधन होता है की वह शरीर में जा कर क्या करेगी. संशोधन के बाद में दवा का प्रयोग पहले प्राणियों और बाद में इंसानों पर किया जाता है.

आयुर्वेदिक दवा शरीर में जो व्यवस्थाये होती है उन्हें मजबूती प्रदान करती है.

उपरोक्त आधार पर यह कहा जा सकता है की होम्योपैथी दवा दूसरी पैथियो की दवा के साथ साथ प्रयुक्त हो सकती है. लेखक का यह मत है की उसे स्टेरोइड के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए.

Sunday, 28 August 2011

बेर्बेरिस वलगारिस (Berberis Vulgaris)

यह दवा असहनीय दर्द की अच्छी दवा मानी जाती है. यह गुर्दों पर विशेष प्रभाव रखती है. इसे गुर्दों की पथरी में काफी प्रयुक्त किया जाता है.
पित्ताशय की पथरी में भी इसका प्रयोग होता है क्यों की यहाँ भी असहनीय दर्द होता है.

Saturday, 27 August 2011

मायज़म सिद्धांत (The theory of Miasm)

मायज़म का सिद्धांत हनीमन ने उसकी पुस्तिका जीर्ण रोग में रखा. हनी मन ने कहा की यह सिद्धांत उसकी १२ साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है.

उसने कहा की यही मायझम हर जीर्ण रोग की जड़ है. केंट ने इस सिद्धांत को बड़े पैमाने पर प्रस्थापित किया. उसने ऐसी दवा भी बतलाई जो इस प्रकार के मायज़म में आराम देगी.

मायज़म का मतलब है एक बदल जो स्वास्थ्य पर छा जाता है. उसने कहा की ८५ % यह आवरण सोरा के रूप में होता है. १५ % यह सिफिलिस या सायकोसिस का रूप लेता है.

सोरा - इस ग्रीक शब्द का अर्थ है कलंक. हनीमन का यह मानना था की त्वचा की बीमारी में, एलर्जी में, बवासीर में सोरा का आवरण छाया रहता है. सोरा आवरण का प्रमुख लक्षण है खुजली होना.
इसकी प्रमुख दवा है. सल्फर, नैटरम मर, कैल्क कार्ब, अर्सेनिकम ऐल्बम, फोस्फोरस इत्यादि.

सायकोसिस  - यह आवरण यौन रोगों में, मूत्र विकारो में, जोड़ो के दर्द में और बलगम के रिसाव में पाया जाता है. मस्सा भी इसका प्रतीक माना जाता है. इस आवरण में तकलीफ वातावरण की नमी से बढ़ जाती है. सास की तकलीफ, नजला, पेशाब में जलन यह पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से इस आवरण को दर्शाते है. इसकी प्रमुख औषधि है थूजा, लेकोपोडियम, नैटरम सल्फ़, कासटीकम इत्यादि.

सिफिलिस - इस आवरण से वात विकार होते है, रक्त के और हड्डी के विकार होते है. तरह तरह के मन के विकार भी हो सकते है. जैसे दारू के अधीन हो जाना, खुदखुशी करने की प्रवृत्ति रखना, पागलपन, फोड़े बनना. ह्रदय रोग और रात को बढ़ने वाले रोग भी इस आवरण के कारण हो सकते है. इसके मुख्य दवाइयां है - आर्सेनिक एल्ब, औरम मेट, मेरकुरी, फोस्फोरुस.



हमें यह लगता है की बहोत ज्यादा इस सिद्धांत में उलझने से यह बेहतर है की समग्र लक्षणों के आधार पर दवा का चयन करे. होम्योपैथी की हर प्रमुख दवा में अनेक आवरणों को हटाने की क्षमता है.